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उत्तराखंड में नर्सिंग बेरोजगारों का आंदोलन 160 दिनों से जारी था। ठोस आश्वासन न मिलने पर उन्होंने आमरण अनशन शुरू किया और सोमवार को परेड ग्राउंड की पानी की टंकी पर चढ़कर विरोध जताया। आंदोलनकारियों में कविता पुंडीर, धर्मेंद्र, विनोद, आनंद पाल और महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला शामिल थीं। कांग्रेस, स्वाभिमान मोर्चा, उत्तराखंड समानता पार्टी, यूकेडी और स्वराज सेवा दल ने आंदोलन को समर्थन दिया। कई दौर की वार्ता के बावजूद समाधान नहीं निकला। आंदोलनकारियों की मांग थी कि नर्सिंग भर्ती को वर्षवार करने का शासनादेश जारी किया जाए। मंगलवार से बुधवार तक स्थिति जस की तस रही और आंदोलन उग्र करने की चेतावनी दी गई। इसके बाद स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा ने शासन को मांग पूरी करने का प्रस्ताव भेजा। दोपहर करीब चार बजे आंदोलनकारी टंकी से नीचे उतरे और उन्हें कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां देर रात तक चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया। प्रस्ताव भेजे जाने के बाद नर्सिंग बेरोजगारों ने आंदोलन को एक महीने के लिए स्थगित कर दिया।
धरना खत्म नहीं स्थगित हुआ है: नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष नवल पुंडीर ने कहा कि स्वास्थ्य महानिदेशक के लिखित आश्वासन पर धरना एक महीने के लिए स्थगित किया गया है। कागजी कार्यवाही के लिए सरकार को एक महीने का समय दिया गया है। सरकार यह बिल्कुल भी न समझे कि धरना खत्म हुआ है। धरना सिर्फ एक महीने के लिए स्थगित किया गया है। वे सभी अपनी मांगों को पूरा करवाने के बाद ही शांत बैठेंगे।



