देहरादून में सोमवार को उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। आरटीई एक्ट लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से मुक्त किए जाने की मांग को लेकर प्रदेशभर से आए शिक्षक राजधानी में रैली निकालकर सचिवालय कूच करने पहुंचे। लेकिन पुलिस ने उन्हें सुभाष रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। रोके जाने से नाराज शिक्षक सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
शिक्षक संघ ने अपनी मांगों के संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा। संघ का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किया गया था। इसके तहत शिक्षक पात्रता परीक्षा की व्यवस्था की गई, लेकिन हाल ही में उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद आरटीई एक्ट लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सामने गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है।
संघ से जुड़े दिगंबर नेगी ने बताया कि वर्तमान में उत्तराखंड में लगभग 20 हजार और पूरे देश में करीब 25 लाख शिक्षक इस आदेश से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक्ट लागू होने से पहले अनेक शिक्षक राज्य सरकार की ओर से निर्धारित नियमों और चयन प्रक्रिया के आधार पर विधिवत नियुक्त हुए थे। इन शिक्षकों ने वर्षों तक निष्ठा और ईमानदारी से सेवाएं दी हैं, इसलिए उन्हें टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाना चाहिए।
संघ ने सुझाव दिया कि यदि न्यायालय के आदेश का अनुपालन आवश्यक हो तो राज्य सरकार अनुभव आधारित एक विशेष परीक्षा आयोजित कर राहत प्रदान कर सकती है। इसके साथ ही संघ ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, प्रारंभिक शिक्षा में तैनात शिक्षकों को तीन साल की सेवा पूरी होने पर गृह जनपद स्थानांतरण का अधिकार देने और गोल्डन कार्ड योजना में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने की मांग भी उठाई।
ढोल-नगाड़ों के साथ निकले इस सचिवालय कूच ने राजधानी के यातायात को प्रभावित किया। कई मार्गों पर जाम की स्थिति बनी रही और आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ी। शिक्षक संघ का कहना है कि उनकी मांगें शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षकों के हितों की रक्षा करने के लिए हैं।



