देहरादून। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने उत्तराखंड और गुजरात में पारित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सवाल उठाए हैं। बोर्ड ने बताया कि उत्तराखंड के यूसीसी को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा चुकी है और यह चुनावी लाभ के लिए उठाया गया कदम है। शुक्रवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) की ओर से प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में बोर्ड के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलयास, एडवोकेट रजिया बेग और लताफत हुसैन ने उत्तराखंड और गुजरात में पारित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को सिरे से खारिज करते हुए राज्य सरकार की नीतियों और पुलिस की कार्यशैली पर चिंता व्यक्त की। नेताओं ने कहा कि यूसीसी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यूसीसी प्रथम दृष्टया संविधान की भावना के विपरीत और भाग-3 में वर्णित नागरिकों के मौलिक व धार्मिक अधिकारों पर सीधा प्रहार बताया गया। बोर्ड का तर्क है कि जब इस कानून से अनुसूचित जनजातियों को बाहर रखा गया है, तो इसे ‘समान’ (यूनिफार्म) कहना भ्रामक है। यह कानून इस्लामी शरियत जैसे निकाह, तलाक और विरासत के नियमों में सीधा हस्तक्षेप करता है। बोर्ड ने उत्तराखंड में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में सरकारी हस्तक्षेप पर कड़ी आपत्ति जताई। बोर्ड ने दस्तावेजों के अभाव का हवाला देकर ऐतिहासिक मस्जिदों और मजारों को ध्वस्त करने की कार्रवाई की निंदा की गई। कहा कि मुस्लिम नाबालिग बच्चियों के अपहरण जैसे मामलों में भी पुलिस का रवैया चिंताजनक है। बोर्ड ने मांग की है कि पंजाब की तर्ज पर उत्तराखंड में भी धर्मों और पवित्र ग्रंथों की गरिमा बनाए रखने के लिए एक कठोर कानून पारित किया जाए।



