देहरादून। देहरादून में ट्रांसजेंडर समुदाय और उनके सहयोगियों ने हाल ही में संसद में पेश किए गए ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन बिल 2026 का विरोध किया। रविवार को तिब्बती मार्केट के पास आयोजित प्रेसवार्ता में ओशिन, मीरा और नैना सहित कई प्रतिनिधियों ने कहा कि यह बिल उनकी राय लिए बिना लाया गया है और इससे उनके वर्षों के संघर्ष से मिले अधिकारों पर खतरा मंडरा रहा है।
समुदाय का आरोप है कि यह संशोधन 2014 के सुप्रीम कोर्ट के नालसा जजमेंट का उल्लंघन करता है, जिसमें स्व-अनुभूत जेंडर पहचान को मान्यता दी गई थी। नए बिल में पहचान का अधिकार व्यक्ति से छीनकर मेडिकल बोर्ड को सौंप दिया गया है, जिससे ट्रांसजेंडर की परिभाषा केवल जैविक आधार तक सीमित हो जाएगी। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि इसे अधिनियम बनने से नहीं रोका गया तो गंभीर परिणाम होंगे।
प्रेसवार्ता में डॉ. स्मृति गुप्ता ने भी समुदाय का समर्थन करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके आंतरिक अनुभव से तय होती है, न कि केवल शारीरिक अंगों से। मिसफिट ट्रांसजेंडर यूथ फाउंडेशन के शमन गुप्ता और वॉयस ऑफ वॉरियर फाउंडेशन की ओशिन सरकार ने सरकार से बिल को तत्काल वापस लेने की अपील की।
समुदाय का मानना है कि यह संशोधन उनकी गरिमा, निजता और पहचान पर सीधा हमला है और ट्रांस पुरुष, ट्रांस महिला तथा नॉन-बाइनरी व्यक्तियों को अधिकारों से वंचित कर देगा। इसलिए उन्होंने इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।



