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Nation Lens > New Delhi > जेल से बरी तक: आबकारी केस में पलटी बाज़ी, अब सवालों के घेरे में जांच एजेंसियां
New Delhi

जेल से बरी तक: आबकारी केस में पलटी बाज़ी, अब सवालों के घेरे में जांच एजेंसियां

Nation Lens
Last updated: February 27, 2026 8:24 am
Nation Lens
Published: February 27, 2026
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नई दिल्ली: दिल्ली की एक विशेष अदालत ने कथित आबकारी नीति (लिकर पॉलिसी) मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने इसे “सत्य की जीत” बताया है।

राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश Jitender Singh ने जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि पेश की गई “विस्तृत चार्जशीट” में कई खामियां हैं और अनेक आरोप ऐसे हैं जिनका किसी गवाह या बयान से पर्याप्त समर्थन नहीं मिलता। अदालत ने कहा कि केजरीवाल के खिलाफ साजिश में शामिल होने का कोई ठोस या बुनियादी सबूत रिकॉर्ड पर नहीं है, जिससे आरोप टिक पाना मुश्किल है।

केजरीवाल का आरोप: राजनीतिक साजिश

फैसले के बाद मीडिया से बातचीत में केजरीवाल ने प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी को खत्म करने के उद्देश्य से उनके खिलाफ साजिश रची गई और पार्टी के पांच बड़े नेताओं को गिरफ्तार किया गया।

केजरीवाल ने कहा, “हमें वर्षों तक भ्रष्ट कहकर बदनाम किया गया, लेकिन आज अदालत ने साफ कर दिया कि हमारे खिलाफ लगाए गए आरोप टिक नहीं पाए। यह ईमानदारी की जीत है।”

भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि एक मौजूदा मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी देश के इतिहास में अभूतपूर्व घटना थी और अदालत का आदेश उनके और उनकी पार्टी के लिए बड़ी राहत है।

सिसोदिया के खिलाफ भी नहीं मिला सबूत

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आबकारी नीति की देखरेख करने के आरोप के बावजूद मनीष सिसोदिया के खिलाफ कोई ठोस आपराधिक साक्ष्य या अवैध धन की बरामदगी सामने नहीं आई। ऐसे में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का आधार नहीं बनता।

हिरासत और जमानत का घटनाक्रम

केजरीवाल को इस मामले में करीब 56 दिन जेल में बिताने पड़े थे। उन्हें सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामले में पहले ही अंतरिम राहत मिल चुकी थी।

वहीं सिसोदिया को फरवरी 2023 में CBI और मार्च 2023 में ED ने गिरफ्तार किया था। वे लगभग 530 दिनों तक हिरासत में रहे।

अन्य आरोपियों को भी राहत

अदालत ने इस मामले में कई अन्य आरोपियों को भी आरोपमुक्त कर दिया है। इनमें विभिन्न कारोबारी और संबंधित व्यक्तियों के नाम शामिल हैं, जिनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

क्या था पूरा मामला?

दिल्ली सरकार ने वर्ष 2021 में नई आबकारी नीति लागू की थी। सरकार का कहना था कि इससे राजस्व बढ़ेगा और शराब व्यापार में सुधार होगा, साथ ही निजी भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।

हालांकि, नीति पर अनियमितताओं के आरोप लगे और बाद में इसे वापस ले लिया गया। दिल्ली के उपराज्यपाल Vinay Kumar Saxena ने मामले की जांच CBI को सौंप दी थी। केंद्रीय एजेंसियों का आरोप था कि नीति कुछ खास संस्थाओं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। इन आरोपों से सभी आरोपी लगातार इनकार करते रहे।

अदालत के ताज़ा फैसले ने इस बहुचर्चित मामले को नया मोड़ दे दिया है और राजनीतिक हलकों में इसकी व्यापक चर्चा हो रही है।

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