आस्था के महाकुंभ में उमड़ा जनसैलाब : रविवार को सूर्योदय से पहले ही श्री दरबार साहिब परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देश-विदेश से आई संगतों ने श्रद्धा और भक्ति भाव से श्री झण्डे जी के समक्ष शीश नवाया और श्री गुरु महाराज जी के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य माना। पूरे परिसर में तिल रखने तक की जगह नहीं थी। हर कोई गुरु महाराज की कृपा पाने और श्री झण्डा साहिब के समक्ष मत्था टेकने को आतुर दिखाई दिया।
दूध, घी, शहद और गंगाजल से हुआ पवित्र स्नान : सुबह 7 बजे से विशेष पूजा-अर्चना आरंभ हुई। 8ः30 बजे श्रद्धालुओं ने पवित्र ध्वज दंड श्री झण्डे जी को उतारा और विधि-विधान से पूजा की। संगतों ने अत्यंत श्रद्धा के साथ दूध, घी, शहद, गंगाजल और पंचगव्य से पवित्र ध्वज का अभिषेक किया। इसके बाद 94 फीट ऊंचे श्री झण्डे जी पर पहले सादे और शनील के गिलाफ चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इस दौरान एक विशेष परंपरा निभाई जाती है। पूरी प्रक्रिया में श्री झण्डे जी को एक क्षण के लिए भी जमीन पर नहीं रखा जाता, बल्कि संगतें अपने हाथों पर उसे थामे रहती हैं।
गुरु की कृपा से जगमगाई द्रोणनगरी: नए मखमली वस्त्र और सुनहरे गोटों से सुसज्जित श्री झण्डा साहिब का आरोहण होते ही पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु लकड़ी की कैंचियों को थामकर पवित्र ध्वज को ऊंचाई तक पहुंचाने में सहभागी बने। यह दृश्य श्रद्धा, समर्पण और गुरु प्रेम की अनुपम मिसाल बना रहा।
“देशवासियों पर सदैव बनी रहे श्री गुरु राम राय जी महाराज की कृपा”
श्री झण्डे जी के आरोहण के बाद श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने देश व प्रदेशवासियों और संगतों को श्री झण्डा जी महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह मेला प्रेम, सद्भावना, भाईचारे, उल्लास और अमन-चैन का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि श्री झण्डे जी के समक्ष शीश नवाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, इसी कारण देश-विदेश से संगतें हर वर्ष इस पावन बेला की प्रतीक्षा करती हैं। उन्होंने प्रार्थना की कि श्री गुरु राम राय जी महाराज की असीम कृपा देश व प्रदेशवासियों और संगतों पर सदैव बनी रहे।



