देहरादून। देहरादून के राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। जांच में सामने आया कि गोविंदगढ़ निवासी अंजित सिंह के आयुष्मान कार्ड और आधार पहचान का इस्तेमाल कर मेरठ निवासी विक्की नामक व्यक्ति का इलाज कराया गया। अस्पताल प्रशासन को संदेह होने पर सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिनमें यह धोखाधड़ी साफ दिखाई दी। पूछताछ में विक्की ने स्वीकार किया कि उसने दूसरे व्यक्ति के कार्ड का उपयोग कर इलाज कराया।
अस्पताल प्रशासन ने इस मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। नगर कोतवाली प्रभारी हरिओम चौहान ने बताया कि अंजित सिंह और विक्की के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 319(2) और 61(2) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। विवेचना उपनिरीक्षक विनयता चौहान को सौंपी गई है।
यह घटना आयुष्मान भारत जैसी महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना की पारदर्शिता और सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है। योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराना है, लेकिन इस तरह की जालसाजी से न केवल सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग होता है बल्कि वास्तविक लाभार्थियों का अधिकार भी छिन जाता है।
इस मामले से स्पष्ट है कि अस्पतालों और प्रशासन को पहचान सत्यापन की प्रक्रिया और मजबूत करनी होगी। आधार और आयुष्मान कार्ड का उपयोग करते समय बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य करना, सीसीटीवी निगरानी को और सख्त करना तथा डिजिटल रिकॉर्ड की क्रॉस-चेकिंग करना जरूरी है। साथ ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई से ही भविष्य में ऐसे फर्जीवाड़ों पर अंकुश लगाया जा सकेगा।



